विवेकानन्द सच्चे देशभक्त थे, इसलिए भाषा के बारे में भी उनका दृष्टिकोण दलाल तत्त्वों से एकदम भिन्न और जनवादी था। लिखा है:
‘‘भाषा का रहस्य है सरलता।’’ भाषा संबंधी मेरा आदर्श मेरे गुरू की भाषा है, जो थी तो नितांत बोल-चाल की भाषा, साथ ही महतम अभिव्यंजक भी। भाषा को अभीष्ट विचार को सम्पे्रषित करने में समर्थ होना चाहिए।
‘‘बंगला भाषा को इतने थोड़े समय में पूर्णता पर पहुंचा देने का प्रयास उसे शुष्क और लोचहीन बना देगा। वास्तव
विवेकानन्द सच्चे देशभक्त थे, इसलिए भाषा के बारे में भी उनका दृष्टिकोण दलाल तत्त्वों से एकदम भिन्न और जनवादी था। लिखा है:
‘‘भाषा का रहस्य है सरलता।’’ भाषा संबंधी मेरा आदर्श मेरे गुरू की भाषा है, जो थी तो नितांत बोल-चाल की भाषा, साथ ही महतम अभिव्यंजक भी। भाषा को अभीष्ट विचार को सम्पे्रषित करने में समर्थ होना चाहिए।
‘‘बंगला भाषा को इतने थोड़े समय में पूर्णता पर पहुंचा देने का प्रयास उसे शुष्क और लोचहीन बना देगा। वास्तव