में इसमें क्रियापदों का अभाव-सा है। मायकेल मधुसूदन दत्त ने अपनी कविता में इस दोष को दूर करने का प्रयत्न किया है। बंगला से सबसे बड़े कवि-कपिल कंकन थे। संस्कृत में सर्वोत्कृष्ट गद्य पंतजलि का महाभाष्य है। उसकी भाषा जीवनप्रद है। हितोपदेश की भाषा भी बुरी नहीं, पर कादम्बरी की भाषा ह्यस का उदाहरण है।
‘‘बंगला भाषा का आदर्श संस्कृत न होकर पाली भाषा होनी चाहिए, क्योंकि
226 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
पाली बंगला से बहुत कुछ
में इसमें क्रियापदों का अभाव-सा है। मायकेल मधुसूदन दत्त ने अपनी कविता में इस दोष को दूर करने का प्रयत्न किया है। बंगला से सबसे बड़े कवि-कपिल कंकन थे। संस्कृत में सर्वोत्कृष्ट गद्य पंतजलि का महाभाष्य है। उसकी भाषा जीवनप्रद है। हितोपदेश की भाषा भी बुरी नहीं, पर कादम्बरी की भाषा ह्यस का उदाहरण है।
‘‘बंगला भाषा का आदर्श संस्कृत न होकर पाली भाषा होनी चाहिए, क्योंकि
226 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
पाली बंगला से बहुत कुछ