मिलती-जुलती है। पर बंगला में पारिभाषिक शब्दों को बनाने अथवा उनका अनुवाद करने में संस्कृत शब्दों का व्यवहार उचित है। नए शब्दों के गढ़ने का भी प्रयत्न होना चाहिए, इसके लिए यदि संस्कृत के कोश से पारिभाषिक शब्दों का संग्रह किया जाये तो उससे बंगला भाषा के निर्माण में बड़ी सहायता मिलेगी।’’ (दशम खंड, पृष्ठ 42)
क्रान्ति की हर तरंग के साथ नई भावनाओं, नए विचारों की उत्पत्ति होती है, उन्हें अभिव्यक्ति प्रदान करने के लिए युग के प्रतिनिधि
मिलती-जुलती है। पर बंगला में पारिभाषिक शब्दों को बनाने अथवा उनका अनुवाद करने में संस्कृत शब्दों का व्यवहार उचित है। नए शब्दों के गढ़ने का भी प्रयत्न होना चाहिए, इसके लिए यदि संस्कृत के कोश से पारिभाषिक शब्दों का संग्रह किया जाये तो उससे बंगला भाषा के निर्माण में बड़ी सहायता मिलेगी।’’ (दशम खंड, पृष्ठ 42)
क्रान्ति की हर तरंग के साथ नई भावनाओं, नए विचारों की उत्पत्ति होती है, उन्हें अभिव्यक्ति प्रदान करने के लिए युग के प्रतिनिधि