‘‘मैं विवाह नहीं करूंगा, और तुम लोग देखोगे कि मैं क्या बनता हूं।’’ विश्वनाथ बाबू बेटे पर किसी प्रकार का दबाव नही डालते थे। अब इस मामले में नरेन्द्र की राय जान लेने का काम उन्होंने अपने संबंधी डाक्टर रामचन्द्र दत्त को सौंपा। जब यह प्रसंग छिड़ा तो नरेन्द्र ने साफ कह दिया कि मैं ब्याह के बंधन में नहीं पड़ूंगा, क्योंकि मैंने जीवन का जो उद्देश्य बना रखा है, ब्याह उसमें बाधक बनेगा। उत्तर सुनकर डाक्टर रामचन्द्र ने कहा, ‘‘यदि वास्तव
‘‘मैं विवाह नहीं करूंगा, और तुम लोग देखोगे कि मैं क्या बनता हूं।’’ विश्वनाथ बाबू बेटे पर किसी प्रकार का दबाव नही डालते थे। अब इस मामले में नरेन्द्र की राय जान लेने का काम उन्होंने अपने संबंधी डाक्टर रामचन्द्र दत्त को सौंपा। जब यह प्रसंग छिड़ा तो नरेन्द्र ने साफ कह दिया कि मैं ब्याह के बंधन में नहीं पड़ूंगा, क्योंकि मैंने जीवन का जो उद्देश्य बना रखा है, ब्याह उसमें बाधक बनेगा। उत्तर सुनकर डाक्टर रामचन्द्र ने कहा, ‘‘यदि वास्तव