में सत्य की प्राप्ति ही तुम्हारा उद्देश्य है तो ब्रह्मसमाज आदि में भटकना व्यर्थ है। तुम दक्षिणेश्वर में श्री रामकृष्ण देव के पास जाओ।’’
नरेन्द्र को सुरेन्द्रनाथ के मकान पर हुई भेंट याद आई और वह तीन-चार मित्रों के साथ दक्षिणेश्वर पहुंचा।
रामकृष्ण चिरपरिचित की तरह सहज भाव से मिले। नरेन्द्र को अपने करीब चटाई पर बैठा लिया और गाना सुनाने को कहा। नरेन्द्र ने ब्रह्मसमाज का ‘मन चलो निज निकेतन’ गीत गाया। फिर नरेन्द्र के अपने
में सत्य की प्राप्ति ही तुम्हारा उद्देश्य है तो ब्रह्मसमाज आदि में भटकना व्यर्थ है। तुम दक्षिणेश्वर में श्री रामकृष्ण देव के पास जाओ।’’
नरेन्द्र को सुरेन्द्रनाथ के मकान पर हुई भेंट याद आई और वह तीन-चार मित्रों के साथ दक्षिणेश्वर पहुंचा।
रामकृष्ण चिरपरिचित की तरह सहज भाव से मिले। नरेन्द्र को अपने करीब चटाई पर बैठा लिया और गाना सुनाने को कहा। नरेन्द्र ने ब्रह्मसमाज का ‘मन चलो निज निकेतन’ गीत गाया। फिर नरेन्द्र के अपने