कवि और लेखक भाषा तथा शैली में परिवर्तन लाते हैं। लेकिन प्रतिक्रियावादी हर क्षेत्र में मौलिकता और परिवर्तन का विरोध करते हैं क्योंकि उन्हें अपने निहित स्वार्थ खतरे में दिखाई देते हैं। मायकेल मधुसूदन दत्त ने अपने ‘मेघनाद-वध’ काव्य में नए विचार अभिव्यक्त करते हुए भाषा में भी मौलिक प्रयोग किया। प्रतिक्रियावादियों ने इसकी हंसी उड़ाते हुए ‘‘छछंूदर-वध’ लिखा है। शिष्य के साथ वार्ता एवं संलाप में विवेकानन्द कहते हैं, ‘‘वे एक अपूर्व
कवि और लेखक भाषा तथा शैली में परिवर्तन लाते हैं। लेकिन प्रतिक्रियावादी हर क्षेत्र में मौलिकता और परिवर्तन का विरोध करते हैं क्योंकि उन्हें अपने निहित स्वार्थ खतरे में दिखाई देते हैं। मायकेल मधुसूदन दत्त ने अपने ‘मेघनाद-वध’ काव्य में नए विचार अभिव्यक्त करते हुए भाषा में भी मौलिक प्रयोग किया। प्रतिक्रियावादियों ने इसकी हंसी उड़ाते हुए ‘‘छछंूदर-वध’ लिखा है। शिष्य के साथ वार्ता एवं संलाप में विवेकानन्द कहते हैं, ‘‘वे एक अपूर्व