मनस्वी व्यक्ति तुम्हारे देश में पैदा हुए थे। ‘मेघनाद-वध’ की तरह का दूसरा काव्य बंगला भाषा में तो है ही नहीं, समस्त यूरोप में भी वैसा कोई काव्य आजकल मिलना कठिन है।’’
शिष्य ने कहा, ‘‘परन्तु महाराज, मायकेल को शायद शब्दाडम्बर बहुत प्रिय है।’’
स्वामी जी-‘‘तुम्हारे देश में कोई कुछ नई बात करे तो तुम लोग उसके पीछे पड़ जाते हो। पहले अच्छी तरह देखो कि वह आदमी क्या कह रहा है। पर ऐसा न करके ज्यांेही किसी में कोई नई बात दिखाई दी कि लोग उसके पीछे पड़ गये,
मनस्वी व्यक्ति तुम्हारे देश में पैदा हुए थे। ‘मेघनाद-वध’ की तरह का दूसरा काव्य बंगला भाषा में तो है ही नहीं, समस्त यूरोप में भी वैसा कोई काव्य आजकल मिलना कठिन है।’’
शिष्य ने कहा, ‘‘परन्तु महाराज, मायकेल को शायद शब्दाडम्बर बहुत प्रिय है।’’
स्वामी जी-‘‘तुम्हारे देश में कोई कुछ नई बात करे तो तुम लोग उसके पीछे पड़ जाते हो। पहले अच्छी तरह देखो कि वह आदमी क्या कह रहा है। पर ऐसा न करके ज्यांेही किसी में कोई नई बात दिखाई दी कि लोग उसके पीछे पड़ गये,