फिर उन्होंने लायबे्ररी से ‘मेघनाद-वध’ काव्य मंगवाया और उसके सर्वोत्कृष्ट अंश की व्याख्या करते हुए कहा, ‘‘जहां पर इंद्रजीत युद्व में निहित हुआ है-मंदोदरी शोक से कातर होकर रावण को युद्व में जाने से रोक रही है, परन्तु पुत्र-शोक को मन से जबरदस्ती हटाकर महावीर की तरह युद्व में जाने का निश्चय कर प्रतिहिंसा
227 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
और क्रोध की आग में स्त्री-पुत्र सब भूलकर वह युद्व के लिए बाहर जाने को तैयार है- वही है काव्य की श्रेष्ठ कल्पना। चाहे जो हो,
फिर उन्होंने लायबे्ररी से ‘मेघनाद-वध’ काव्य मंगवाया और उसके सर्वोत्कृष्ट अंश की व्याख्या करते हुए कहा, ‘‘जहां पर इंद्रजीत युद्व में निहित हुआ है-मंदोदरी शोक से कातर होकर रावण को युद्व में जाने से रोक रही है, परन्तु पुत्र-शोक को मन से जबरदस्ती हटाकर महावीर की तरह युद्व में जाने का निश्चय कर प्रतिहिंसा
227 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
और क्रोध की आग में स्त्री-पुत्र सब भूलकर वह युद्व के लिए बाहर जाने को तैयार है- वही है काव्य की श्रेष्ठ कल्पना। चाहे जो हो,