शैली और परिवर्तन का द्वन्द्वात्मक सम्बंध भली-भान्ति समझ में आ जायेगा।
स्वामीजी ने कहा-‘‘उस दिन मैंने ‘हिन्दू धर्म क्या है’’? इस विषय पर बंगला भाषा में एक लेख लिखा तो तुम्हीं में से किसी ने कहा कि इसकी भाषा तो प्रांजल नहीं। मेरा अनुमान है कि सब वस्तुओं की तरह कुछ समय के बाद भाषा और भाव भी फीके पड़ जाते हैं। आजकल इस देश में यही हुआ है, ऐसा जान पड़ता है। श्री गुरूदेव के आगमन से भाव और भाषा में नवीन प्रवाह आ गया है। अब सबको नवीन सांचे में ढालना है,
शैली और परिवर्तन का द्वन्द्वात्मक सम्बंध भली-भान्ति समझ में आ जायेगा।
स्वामीजी ने कहा-‘‘उस दिन मैंने ‘हिन्दू धर्म क्या है’’? इस विषय पर बंगला भाषा में एक लेख लिखा तो तुम्हीं में से किसी ने कहा कि इसकी भाषा तो प्रांजल नहीं। मेरा अनुमान है कि सब वस्तुओं की तरह कुछ समय के बाद भाषा और भाव भी फीके पड़ जाते हैं। आजकल इस देश में यही हुआ है, ऐसा जान पड़ता है। श्री गुरूदेव के आगमन से भाव और भाषा में नवीन प्रवाह आ गया है। अब सबको नवीन सांचे में ढालना है,