योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

नहीं आती। विशेषण द्वारा क्रियापदों का प्रयोग करते हैं। इससे भाषा में ओज अधिक बढ़ता है। आगे तुम लोग इस प्रकार लिखने की चेष्टा करो तो ‘उद्बोधन’ में ऐसी ही भाषा में लेख लिखने का प्रयत्न करना। भाषा में क्रियापद प्रयोग करने का क्या तात्पर्य है ? जानते हो ? इस प्रकार भावों को विराम मिलता है। इसलिए अधिक क्रियापदों का प्रयोग करना जल्दी-जल्दी श्वास लेने के समान दुर्बलता का चिहृ मात्र है। यही कारण है कि बंगला भाषा में अच्छी वक्तृता


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नहीं आती। विशेषण द्वारा क्रियापदों का प्रयोग करते हैं। इससे भाषा में ओज अधिक बढ़ता है। आगे तुम लोग इस प्रकार लिखने की चेष्टा करो तो ‘उद्बोधन’ में ऐसी ही भाषा में लेख लिखने का प्रयत्न करना। भाषा में क्रियापद प्रयोग करने का क्या तात्पर्य है ? जानते हो ? इस प्रकार भावों को विराम मिलता है। इसलिए अधिक क्रियापदों का प्रयोग करना जल्दी-जल्दी श्वास लेने के समान दुर्बलता का चिहृ मात्र है। यही कारण है कि बंगला भाषा में अच्छी वक्तृता


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