लोग बचे रह सकेंगे। नहीं तो शीघ्र ही इस देश और जाति को मृत्यु की छाया ढक लेगी।
(पृष्ठ 65)
‘उद्बोधन’ स्वामी जी की अपनी पत्रिका थी। इसमें उन्होंने कविताएं भी लिखी, निबंध भी लिखे और बंगला भाषा तथा साहित्य को समृद्व बनाया पहले हम उनकी कविताओं पर विचार करेंगे। उदाहरण के लिए ‘संन्यासी का गीत’ नाम की कविता लीजिए जो जुलाई 1895 में न्यूयार्क के थाऊजेंड आईलैंड पार्क में लिखी गई थी
तोड़ो सब श्रृंखला, उन्हें निज जीवन बंधन जान,
लोग बचे रह सकेंगे। नहीं तो शीघ्र ही इस देश और जाति को मृत्यु की छाया ढक लेगी।
(पृष्ठ 65)
‘उद्बोधन’ स्वामी जी की अपनी पत्रिका थी। इसमें उन्होंने कविताएं भी लिखी, निबंध भी लिखे और बंगला भाषा तथा साहित्य को समृद्व बनाया पहले हम उनकी कविताओं पर विचार करेंगे। उदाहरण के लिए ‘संन्यासी का गीत’ नाम की कविता लीजिए जो जुलाई 1895 में न्यूयार्क के थाऊजेंड आईलैंड पार्क में लिखी गई थी
तोड़ो सब श्रृंखला, उन्हें निज जीवन बंधन जान,