फिर लिखा है, ‘‘वेदान्त का प्रभाव यूरोप के काव्य और दर्शन-शास्त्र में बहुत है। सभी अच्छे कवि वेदान्ती हैं। दार्शनिक तत्त्व लिखने चले कि घूम-फिर कर वेदान्त। परन्तु हां, कोई-कोई स्वीकार नहीं करना चाहते। अपनी मौलिकता बहाल रखना चाहते हैं-जैसे हर्बर्ट स्पेन्सर आदि। परन्तु अधिकांश लोग स्पष्ट रूप से स्वीकार करते हैं। और बिना किये जायें भी कहां-इस तार, रेलवे और अखबारों के जमाने में।’’ अष्टम खंड, पृष्ठ 203
जो लोग ‘वादों’ से ऊपर उठने की बात करते हैं,
फिर लिखा है, ‘‘वेदान्त का प्रभाव यूरोप के काव्य और दर्शन-शास्त्र में बहुत है। सभी अच्छे कवि वेदान्ती हैं। दार्शनिक तत्त्व लिखने चले कि घूम-फिर कर वेदान्त। परन्तु हां, कोई-कोई स्वीकार नहीं करना चाहते। अपनी मौलिकता बहाल रखना चाहते हैं-जैसे हर्बर्ट स्पेन्सर आदि। परन्तु अधिकांश लोग स्पष्ट रूप से स्वीकार करते हैं। और बिना किये जायें भी कहां-इस तार, रेलवे और अखबारों के जमाने में।’’ अष्टम खंड, पृष्ठ 203
जो लोग ‘वादों’ से ऊपर उठने की बात करते हैं,