उस परम प्रभु की उपासना करो,
जिसे सामने देख रहे हो,
अन्य सभी प्रतिमाएं तोड़ दो।
यह वेदान्त दर्शन का -यत्रजीव तत्र शिव रूप है, जिसे रामकृष्ण परमहंस ने विकसित किया और जिसे विवेकानन्द ने समझा और वे वेदान्त को जंगल से नगर में लाये, उसे व्यवहार में ढाला और कहा कि सदियों से पिसते आ रहे भारत के श्रमजीवी ही तुम्हारे देवता हैं, इन्हीं की पूजा करो। और सब देवताओं को पचास साल के लिए ताक पर रख दो। बस, यह दरिद्र नारायण ही तुम्हारा उपास्य है।
उस परम प्रभु की उपासना करो,
जिसे सामने देख रहे हो,
अन्य सभी प्रतिमाएं तोड़ दो।
यह वेदान्त दर्शन का -यत्रजीव तत्र शिव रूप है, जिसे रामकृष्ण परमहंस ने विकसित किया और जिसे विवेकानन्द ने समझा और वे वेदान्त को जंगल से नगर में लाये, उसे व्यवहार में ढाला और कहा कि सदियों से पिसते आ रहे भारत के श्रमजीवी ही तुम्हारे देवता हैं, इन्हीं की पूजा करो। और सब देवताओं को पचास साल के लिए ताक पर रख दो। बस, यह दरिद्र नारायण ही तुम्हारा उपास्य है।