योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand


पक्षियों ने सहगान गाये हैं,

फूलों ने, तारों की भांन्ति चमकते ओस कणों का मुकुट पहनकर

झूम-झूमकर तुम्हारा संुदर स्वागत किया है।

झीलों ने प्यार भरा हृदय तुम्हारे लिए खोला है

और अपने सहस-सहस कमल नेत्रों के द्वारा मन की गहराई से निहारा है तुम्हें।

हे प्रकाश के देवता। सभी तुम्हारे स्वागत में संलग्न हैं।

आज तुम्हारा नव स्वागत है।

हे सूर्य, तुम आज मुक्ति ज्योति फैलाते हो।।

स्वाधीनता का आगमन है, इसलिए कवि ने उजाले


1162 of 1197


पक्षियों ने सहगान गाये हैं,

फूलों ने, तारों की भांन्ति चमकते ओस कणों का मुकुट पहनकर

झूम-झूमकर तुम्हारा संुदर स्वागत किया है।

झीलों ने प्यार भरा हृदय तुम्हारे लिए खोला है

और अपने सहस-सहस कमल नेत्रों के द्वारा मन की गहराई से निहारा है तुम्हें।

हे प्रकाश के देवता। सभी तुम्हारे स्वागत में संलग्न हैं।

आज तुम्हारा नव स्वागत है।

हे सूर्य, तुम आज मुक्ति ज्योति फैलाते हो।।

स्वाधीनता का आगमन है, इसलिए कवि ने उजाले


1162 of 1197