और उल्लास का वातावरण उत्पन्न किया है और स्वाधीनता को प्रकाश पुंज सूर्य से उपमा दी है। फिर लिखा है:
तुम्हीं सोचो, संसार ने तुम्हारी कितनी प्रतीक्षा की
कितना खोजा तुम्हें, युग-युग तक, देश देश घूम कर कितना खोजा गया।
कुछ ने घर छोड़े, मित्रों का प्यार खोया, स्वयं को निर्वासित किया,
निर्जन महा सागरों, सुनसान जंगलों में कितना भटके,
एक एक कदम मर मौत और जिंदगी की सवाल आ गया,
लेकिन, वह दिन भी आया, जब संघर्ष फले,
पूजा, श्रद्वा और बलिदान पूर्ण हुए,
और उल्लास का वातावरण उत्पन्न किया है और स्वाधीनता को प्रकाश पुंज सूर्य से उपमा दी है। फिर लिखा है:
तुम्हीं सोचो, संसार ने तुम्हारी कितनी प्रतीक्षा की
कितना खोजा तुम्हें, युग-युग तक, देश देश घूम कर कितना खोजा गया।
कुछ ने घर छोड़े, मित्रों का प्यार खोया, स्वयं को निर्वासित किया,
निर्जन महा सागरों, सुनसान जंगलों में कितना भटके,
एक एक कदम मर मौत और जिंदगी की सवाल आ गया,
लेकिन, वह दिन भी आया, जब संघर्ष फले,
पूजा, श्रद्वा और बलिदान पूर्ण हुए,