अंगीकृत हुए-तुमने अनुग्रह किया
और समस्त मानवता पर स्वातंन्न्य-प्रकाश विकीर्ण किया
ओ देवता, निर्बाध बहो, अपने पथ पर,
तब तक, जब तक कि यह सूर्य आकाश के मध्य में न आ जाये-
जब तक तुम्हारा आलोक विश्व में प्रत्येक देश में प्रतिफलित न हो,
जब तक नारी और पुरूष सभी उन्नत मस्तक यह नहीं देखें
332 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
कि उनकी जंजीरें टूट गयी।
और नवीन सुखों के बसंत में (उन्हें) नवजीवन मिला।
स्वाधीनता की तड़प,
अंगीकृत हुए-तुमने अनुग्रह किया
और समस्त मानवता पर स्वातंन्न्य-प्रकाश विकीर्ण किया
ओ देवता, निर्बाध बहो, अपने पथ पर,
तब तक, जब तक कि यह सूर्य आकाश के मध्य में न आ जाये-
जब तक तुम्हारा आलोक विश्व में प्रत्येक देश में प्रतिफलित न हो,
जब तक नारी और पुरूष सभी उन्नत मस्तक यह नहीं देखें
332 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
कि उनकी जंजीरें टूट गयी।
और नवीन सुखों के बसंत में (उन्हें) नवजीवन मिला।
स्वाधीनता की तड़प,