गया था। ‘हमारी वर्तमान समस्या’ ‘ज्ञानार्जन’ भारत का ऐतिहासिक क्रम-विकास’ ‘चिंतनीय बातें’ तथा प्राच्य और पाश्चात्य’ उनकी उत्कृष्ट रचनाएं हैं। ‘प्राच्य और
233 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
पाश्चात्य’ एक लम्बा निबंध है, जो पुस्तक रूप में छपा था, पूर्व और पश्चिम के तुलनात्मक अध्ययन का परिणाम है और विवेकानन्द की सूक्ष्म दृष्टि का परिचायक है। इसमें खोराक, पोशाक, आचार-व्यवहार, रीति-रिवाज, साहित्य-कला और उत्थान-पतन सभी की चर्चा
गया था। ‘हमारी वर्तमान समस्या’ ‘ज्ञानार्जन’ भारत का ऐतिहासिक क्रम-विकास’ ‘चिंतनीय बातें’ तथा प्राच्य और पाश्चात्य’ उनकी उत्कृष्ट रचनाएं हैं। ‘प्राच्य और
233 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
पाश्चात्य’ एक लम्बा निबंध है, जो पुस्तक रूप में छपा था, पूर्व और पश्चिम के तुलनात्मक अध्ययन का परिणाम है और विवेकानन्द की सूक्ष्म दृष्टि का परिचायक है। इसमें खोराक, पोशाक, आचार-व्यवहार, रीति-रिवाज, साहित्य-कला और उत्थान-पतन सभी की चर्चा