है और सुन्दर तथा ज्ञान-वर्धक चर्चा है। वानगी के कुछ नमूने देखिए और शैली की दाद दीजिए:
‘‘चीनियों का भोजन सचमुच एक कसरत है। हमारे देश में जैसे पानवाली लोहे के पतर के दो टुकड़ों से पान तराशती है, उसी प्रकार चीनी दाहिने हाथ में लकड़ी के दो टुकड़े अपनी हथेली और अंगुलियों के बीच में चिमटे की तरह पकड़ते हैं और उसी से तरकारी आदि खाते है।ं फिर दोनों को एकत्र कर एक कटोरी भात मुंह के पास लाकर दोनों के सहारे उस भात को ठेल-ठेल कर मुंह में डालते हैं।’’
है और सुन्दर तथा ज्ञान-वर्धक चर्चा है। वानगी के कुछ नमूने देखिए और शैली की दाद दीजिए:
‘‘चीनियों का भोजन सचमुच एक कसरत है। हमारे देश में जैसे पानवाली लोहे के पतर के दो टुकड़ों से पान तराशती है, उसी प्रकार चीनी दाहिने हाथ में लकड़ी के दो टुकड़े अपनी हथेली और अंगुलियों के बीच में चिमटे की तरह पकड़ते हैं और उसी से तरकारी आदि खाते है।ं फिर दोनों को एकत्र कर एक कटोरी भात मुंह के पास लाकर दोनों के सहारे उस भात को ठेल-ठेल कर मुंह में डालते हैं।’’