कुछ नहीं पर रहे हैं।..यहां सबसे अधिक दुर्दशा कलाओं की हुई है। पहले सभी वृद्वाएं दीवालों को रंग-बिरंगी रंगती थी, आंगन को फूल-पत्ते के चित्रों से सजाती ािी, खाने-पीने की चीजों को भी कलात्मक ढंग से सजाती थी, यह सब या तो चूल्हे में चला गया या शीघ्र ही जा रहा है। नई चीजें अवश्य ही सीखनी होंगी और करनी भी होंगी, पर पुरानी चीजों को जल में डुबाकर ? नई बातें तुमने खाक सीखी हैं, केवल बकवाद करना जानते हो। काम की विद्या तुमने कौन-सी
कुछ नहीं पर रहे हैं।..यहां सबसे अधिक दुर्दशा कलाओं की हुई है। पहले सभी वृद्वाएं दीवालों को रंग-बिरंगी रंगती थी, आंगन को फूल-पत्ते के चित्रों से सजाती ािी, खाने-पीने की चीजों को भी कलात्मक ढंग से सजाती थी, यह सब या तो चूल्हे में चला गया या शीघ्र ही जा रहा है। नई चीजें अवश्य ही सीखनी होंगी और करनी भी होंगी, पर पुरानी चीजों को जल में डुबाकर ? नई बातें तुमने खाक सीखी हैं, केवल बकवाद करना जानते हो। काम की विद्या तुमने कौन-सी