जबकि दूसरी आर्थिक सिद्वान्तों पर निर्मित एक इमारत मात्र है। जड़ पदार्थ का महत्त्व भावों को व्यक्त कर सकने की उसकी क्षमता ही पर निर्भर है।’’ (पृष्ठ 43)
भोपेन्द्रनाथ दत्त हमें बताते हैं कि भारत-भ्रमण के दिनों में वास्तु-कला संबंधी वस्तुओं का संग्रह तथा अध्ययन विवेकानन्द की हाॅबी था। 1874 में जब उनके पिता रामपुर में थे तो उनके एक संबंधी रामदादा ने एक पारिवारिक नाटक-मंडली संगठित की थी। इस नाटक मंडली द्वारा रामदादा के लिखे
जबकि दूसरी आर्थिक सिद्वान्तों पर निर्मित एक इमारत मात्र है। जड़ पदार्थ का महत्त्व भावों को व्यक्त कर सकने की उसकी क्षमता ही पर निर्भर है।’’ (पृष्ठ 43)
भोपेन्द्रनाथ दत्त हमें बताते हैं कि भारत-भ्रमण के दिनों में वास्तु-कला संबंधी वस्तुओं का संग्रह तथा अध्ययन विवेकानन्द की हाॅबी था। 1874 में जब उनके पिता रामपुर में थे तो उनके एक संबंधी रामदादा ने एक पारिवारिक नाटक-मंडली संगठित की थी। इस नाटक मंडली द्वारा रामदादा के लिखे