हुए तीन नाटक (1) क्या यही महन्ती है ? (2) शराबी की मां का विलाप और (3) बाल्य विवाह खेले गये। इन नाटाकों में विवेकानन्द गाना गाते और अभिनय तो करते ही थे। इसके अलावा वे नाटकों के दृश्य पर्दों पर चित्रित करते थे। चित्र-कला का अभ्यास तो उन्होंने बाद में जारी नहीं रखा, पर वे इसके पारखी तथा आलोचक थे। अतएव वे लिखते हैं
‘‘यूनानी कला का रहस्य है प्रकृति के सूक्ष्म ब्योरों तक का अनुकरण करना, पर भारतीय कला का रहस्य है आदर्श की
हुए तीन नाटक (1) क्या यही महन्ती है ? (2) शराबी की मां का विलाप और (3) बाल्य विवाह खेले गये। इन नाटाकों में विवेकानन्द गाना गाते और अभिनय तो करते ही थे। इसके अलावा वे नाटकों के दृश्य पर्दों पर चित्रित करते थे। चित्र-कला का अभ्यास तो उन्होंने बाद में जारी नहीं रखा, पर वे इसके पारखी तथा आलोचक थे। अतएव वे लिखते हैं
‘‘यूनानी कला का रहस्य है प्रकृति के सूक्ष्म ब्योरों तक का अनुकरण करना, पर भारतीय कला का रहस्य है आदर्श की