अभिव्यक्ति करना। यूनानी चित्रकार की समस्त शक्ति मांस के एक टुकड़े ही को चित्रित करने में व्यय हो जाती है और वह उसमें इतना सफल होता है कि यदि कुत्ता उसे देख ले तो उसे सममुख का मांस समझकर खाने दौड़ा आये। किन्तु इस प्रकार प्रकृति के अनुकरण में क्या गौरव है ? कुत्ते के सामने यथार्थ मांस का एक टुकड़ा ही क्यों न डाल दिया जाए ?’’ (वही, पृष्ठ 43)
जब वे दूसरी विदेश यात्रा से लौट आये थे तो शिष्य के साथ ‘वार्ता एवं संलाप में वे कहते हैं:
अभिव्यक्ति करना। यूनानी चित्रकार की समस्त शक्ति मांस के एक टुकड़े ही को चित्रित करने में व्यय हो जाती है और वह उसमें इतना सफल होता है कि यदि कुत्ता उसे देख ले तो उसे सममुख का मांस समझकर खाने दौड़ा आये। किन्तु इस प्रकार प्रकृति के अनुकरण में क्या गौरव है ? कुत्ते के सामने यथार्थ मांस का एक टुकड़ा ही क्यों न डाल दिया जाए ?’’ (वही, पृष्ठ 43)
जब वे दूसरी विदेश यात्रा से लौट आये थे तो शिष्य के साथ ‘वार्ता एवं संलाप में वे कहते हैं: