स्वामीजी-आज एक मजेदार बात हुई है। मैं एक मित्र के घर गया था। उन्होंने एक चित्र बनवाया था-विषय था कुरूक्षेत्र में अर्जुन-कृष्ण संवाद। श्रीकृष्ण रथ में खड़े हैं। हाथ में रास है और अर्जुन को गीता का उपदेश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे चित्र दिखाकर मेरी सम्मति मांगी। मैंने कहा, ठीक है। किन्तु जब वे न माने, तो उन्हें मुझे अपना सच्चा मत बताना पड़ा कि उस चित्र में मुझे प्रशंसा योग्य कुछ नहीं दिखाई पड़ा। प्रथम तो श्रीकृष्ण के युग
स्वामीजी-आज एक मजेदार बात हुई है। मैं एक मित्र के घर गया था। उन्होंने एक चित्र बनवाया था-विषय था कुरूक्षेत्र में अर्जुन-कृष्ण संवाद। श्रीकृष्ण रथ में खड़े हैं। हाथ में रास है और अर्जुन को गीता का उपदेश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे चित्र दिखाकर मेरी सम्मति मांगी। मैंने कहा, ठीक है। किन्तु जब वे न माने, तो उन्हें मुझे अपना सच्चा मत बताना पड़ा कि उस चित्र में मुझे प्रशंसा योग्य कुछ नहीं दिखाई पड़ा। प्रथम तो श्रीकृष्ण के युग