योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

यूनान की पौराणिक कथाओं में वर्णित रथों के चित्र तुमने देखे हैं ? उनमें दो चाक होते हैं और उन पर पीछे से चढ़ा जाता है। हमारे रथ भी ऐसे ही थे। यदि चित्र के इन गौण अंगों ही का अंकन सही नहीं हुआ, तो चित्र बनाने से क्या लाभ ? ऐतिहासिक चित्र तभी उच्च कोटि का होगा, जब उचित अध्ययन तथा गवेषण के बाद, वस्तु का वैसा ही चित्रण किया जाये, जैसी वह उस युग में थी। यदि चित्र में यर्थाथता नहीं है, तो उसका कोई मूल्य नहीं। आजकल, हमारे जो युवक चित्र-कला के क्षेत्र में प्रवेश करते हैं,


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यूनान की पौराणिक कथाओं में वर्णित रथों के चित्र तुमने देखे हैं ? उनमें दो चाक होते हैं और उन पर पीछे से चढ़ा जाता है। हमारे रथ भी ऐसे ही थे। यदि चित्र के इन गौण अंगों ही का अंकन सही नहीं हुआ, तो चित्र बनाने से क्या लाभ ? ऐतिहासिक चित्र तभी उच्च कोटि का होगा, जब उचित अध्ययन तथा गवेषण के बाद, वस्तु का वैसा ही चित्रण किया जाये, जैसी वह उस युग में थी। यदि चित्र में यर्थाथता नहीं है, तो उसका कोई मूल्य नहीं। आजकल, हमारे जो युवक चित्र-कला के क्षेत्र में प्रवेश करते हैं,


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