इसलिए कृष्ण की छवि से गीता का मूलतत्व अभिव्यक्त होना चाहिए।’’ (अष्टम खंड, पृष्ठ 237-38)
और इससे पहले देखिए। शिष्य कहता है:
‘‘मैंने कहा-महाराज, मैंने कुछ जापानी चित्रकला के नमूने देखे हैं, और कला की प्रशंसा किये बिना नहीं रहा जाता और उनकी प्रेरणा का óोत उनकी अपनी संस्कृति है (वह अनुकरण से परे है) स्वामीजी-बिलकुल ठीक है। आज जापान एक महान राष्ट्र है, और इसका कारण है उनकी कला। देखते नहीं, हमारे सामने वे भी एशियावासी है और यद्यपि आज हम अपना सर्वस्व खो बैठे हैं,
इसलिए कृष्ण की छवि से गीता का मूलतत्व अभिव्यक्त होना चाहिए।’’ (अष्टम खंड, पृष्ठ 237-38)
और इससे पहले देखिए। शिष्य कहता है:
‘‘मैंने कहा-महाराज, मैंने कुछ जापानी चित्रकला के नमूने देखे हैं, और कला की प्रशंसा किये बिना नहीं रहा जाता और उनकी प्रेरणा का óोत उनकी अपनी संस्कृति है (वह अनुकरण से परे है) स्वामीजी-बिलकुल ठीक है। आज जापान एक महान राष्ट्र है, और इसका कारण है उनकी कला। देखते नहीं, हमारे सामने वे भी एशियावासी है और यद्यपि आज हम अपना सर्वस्व खो बैठे हैं,