फिर भी हमारे पास जो कुछ अवशेष है, वही विश्व को चकित कर देने के लिए काफी है। एशिया की आत्मा ही कलात्मक है-एशिया का हृदय चिरकाल से कला की क्रीड़ास्थली रहा है। एशियावासी कलाशून्य वस्तु का कभी प्रयोग नहीं करता-उसके उपयोग की हर वस्तु कला से शोभित है। तुम नहीं जानते, हमारे यहां कला उपयोग की हर वस्तु कला से शोभित है। तुम नहीं जानते, हमारे यहां कला हमारे धार्मिक जीवन का एक अंग बन गई है ? हमारे देश में कोई युवती तीज त्यौहार, पर्व-उत्सव
फिर भी हमारे पास जो कुछ अवशेष है, वही विश्व को चकित कर देने के लिए काफी है। एशिया की आत्मा ही कलात्मक है-एशिया का हृदय चिरकाल से कला की क्रीड़ास्थली रहा है। एशियावासी कलाशून्य वस्तु का कभी प्रयोग नहीं करता-उसके उपयोग की हर वस्तु कला से शोभित है। तुम नहीं जानते, हमारे यहां कला उपयोग की हर वस्तु कला से शोभित है। तुम नहीं जानते, हमारे यहां कला हमारे धार्मिक जीवन का एक अंग बन गई है ? हमारे देश में कोई युवती तीज त्यौहार, पर्व-उत्सव