और दूसरों का पीतल हमारे लिए सोना बन गया है। यह हमारी आधुनिक शिक्षा का जादू है ! देखो, यूरोपीय जब से एशिया के सम्पर्क में आये हैं, तब से कहीं उन्होंने अपने जीवन को कलामय बनाने का प्रयत्न किया है:
मैं-महाराज, यदि कोई आपकी बात सुनेगा तो कहेगा कि आप निराशावादी हो रहे हैं ।
स्वामीजी-स्वाभाविक है ! जो जड़ हो गये हैं, वे और क्या सोच सकेंगे ? उफ् ! कोई मेरी आंखों से देखे! डनकी इमारतें देखो, वे कितनी साधारण, कितनी अर्थ शून्य है ! इन विशाल सरकारी इमारतों को देखो,
और दूसरों का पीतल हमारे लिए सोना बन गया है। यह हमारी आधुनिक शिक्षा का जादू है ! देखो, यूरोपीय जब से एशिया के सम्पर्क में आये हैं, तब से कहीं उन्होंने अपने जीवन को कलामय बनाने का प्रयत्न किया है:
मैं-महाराज, यदि कोई आपकी बात सुनेगा तो कहेगा कि आप निराशावादी हो रहे हैं ।
स्वामीजी-स्वाभाविक है ! जो जड़ हो गये हैं, वे और क्या सोच सकेंगे ? उफ् ! कोई मेरी आंखों से देखे! डनकी इमारतें देखो, वे कितनी साधारण, कितनी अर्थ शून्य है ! इन विशाल सरकारी इमारतों को देखो,