क्या इनका बाह्य स्वरूप देखकर कुछ अनुमान लगाया जा सकता है ? यह किस भाव, किस आदर्श का प्रतीक है ? नहीं, क्योंकि ये सब प्रतीक शून्य हैं। पाश्चात्यों का यह पहनावा ही लो-उनके तंग कोट, सीेधे पैंट, शरीर पर इतने तंग और चिपके होते हैं कि बिलकुल भद्दे मालूम देते हैं, नहीं ? पर हम लोग, पता नहीं, उनमें क्या सुंदरता देखते हैं ? जिसे देखो कोट-पतलून डांटे है। इस देश का भ्रमण तो करो, और यदि देखने के लिए आंखे और समझने के लिए बुद्वि है
क्या इनका बाह्य स्वरूप देखकर कुछ अनुमान लगाया जा सकता है ? यह किस भाव, किस आदर्श का प्रतीक है ? नहीं, क्योंकि ये सब प्रतीक शून्य हैं। पाश्चात्यों का यह पहनावा ही लो-उनके तंग कोट, सीेधे पैंट, शरीर पर इतने तंग और चिपके होते हैं कि बिलकुल भद्दे मालूम देते हैं, नहीं ? पर हम लोग, पता नहीं, उनमें क्या सुंदरता देखते हैं ? जिसे देखो कोट-पतलून डांटे है। इस देश का भ्रमण तो करो, और यदि देखने के लिए आंखे और समझने के लिए बुद्वि है