जाति में प्रविष्ट हुआ तथा और ऊंचाा उठने लगा। पथ के दोनों ओर मुझे देव-देवताओं के सूक्ष्म शरीर दीख पड़ने लगे। उस मंडल को भी पार करके मन वहां पहुंच गया, जहां प्रकाश की एक मर्यादा-रेखा सापेक्ष्य अस्तित्व को निरपेक्ष्य से पृथक कर रही थी। उस रेखा का भी उल्लंघन करके मन वहां पहुंच गया, जहां सरूप कुछ भी नहीं अपने-अपने आसन पर ही संतुष्ट थे। किन्तु क्षण-भर बाद ही मैंने सात ऋषियों को समाधि लगाए बैठे देखा। मुझे ध्यान हुआ कि इन ऋषियों ने ज्ञान और पवित्रता में,
जाति में प्रविष्ट हुआ तथा और ऊंचाा उठने लगा। पथ के दोनों ओर मुझे देव-देवताओं के सूक्ष्म शरीर दीख पड़ने लगे। उस मंडल को भी पार करके मन वहां पहुंच गया, जहां प्रकाश की एक मर्यादा-रेखा सापेक्ष्य अस्तित्व को निरपेक्ष्य से पृथक कर रही थी। उस रेखा का भी उल्लंघन करके मन वहां पहुंच गया, जहां सरूप कुछ भी नहीं अपने-अपने आसन पर ही संतुष्ट थे। किन्तु क्षण-भर बाद ही मैंने सात ऋषियों को समाधि लगाए बैठे देखा। मुझे ध्यान हुआ कि इन ऋषियों ने ज्ञान और पवित्रता में,