योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



नरेन्द्र घबराया और भय से चिल्ला उठा, ‘‘अजी, आपने यह मेरी कैसी अवस्था कर डाली, मेरे तो मां-बाप हैं।’’

अब वह अद्भुत पागल खिलखिलाकर हंस पड़ा और नरेन्द्र का हाथ अपनी छाती पर रखकर बोला, ‘‘अच्छा, तो फिर अभी रहने दे।’’

इसके बाद रामकृष्ण परमहंस फिर सामान्य स्थिति में आ गए। उन्होंने नरेन्द्र को पहले ही दिन की तरह प्रेमपूर्वक खिलाया-पिलाया, विभिन्न विषयों पर बातचीत की, प्यार और हास-परिहास किया और शाम को जब नरेन्द्र ने विदा चाही तो उन्होंने अप्रसन्न होकर कहा,


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नरेन्द्र घबराया और भय से चिल्ला उठा, ‘‘अजी, आपने यह मेरी कैसी अवस्था कर डाली, मेरे तो मां-बाप हैं।’’

अब वह अद्भुत पागल खिलखिलाकर हंस पड़ा और नरेन्द्र का हाथ अपनी छाती पर रखकर बोला, ‘‘अच्छा, तो फिर अभी रहने दे।’’

इसके बाद रामकृष्ण परमहंस फिर सामान्य स्थिति में आ गए। उन्होंने नरेन्द्र को पहले ही दिन की तरह प्रेमपूर्वक खिलाया-पिलाया, विभिन्न विषयों पर बातचीत की, प्यार और हास-परिहास किया और शाम को जब नरेन्द्र ने विदा चाही तो उन्होंने अप्रसन्न होकर कहा,


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