हो सका। इसी स्वभाव में आज एक प्रचंड आघात प्राप्त हुआ है। इससे संकल्प का उदय हुआ-जैसे भी हो सके, इस अद्भुत पुरूष के स्वभाव और शक्ति की बात अवश्य ही समझनी होगी।’’
छरअसल यह अद्भुत पुरूष ही वह जीता-जागता आदर्श था, नरेन्द्र जिसे खोजता हुआ दक्षिणेशर पहुंचा था। लेकिन इस दृढ़ संस्कारयुक्त युवक ने इस अद्भुत
32 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
पुरूष को तब तक गुरू के रूप में धारण नहीं किया जब तक उनके स्वभाव और शक्ति को भली प्रकार समझ नहीं लिया।
हो सका। इसी स्वभाव में आज एक प्रचंड आघात प्राप्त हुआ है। इससे संकल्प का उदय हुआ-जैसे भी हो सके, इस अद्भुत पुरूष के स्वभाव और शक्ति की बात अवश्य ही समझनी होगी।’’
छरअसल यह अद्भुत पुरूष ही वह जीता-जागता आदर्श था, नरेन्द्र जिसे खोजता हुआ दक्षिणेशर पहुंचा था। लेकिन इस दृढ़ संस्कारयुक्त युवक ने इस अद्भुत
32 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
पुरूष को तब तक गुरू के रूप में धारण नहीं किया जब तक उनके स्वभाव और शक्ति को भली प्रकार समझ नहीं लिया।