अब देखना यह है कि इस अद्भुत पुरूष का स्वभाव और शक्ति क्या थी। नरेन्द्र ने उसे कैसे पहचाना और इस अद्भुत पुरूष ने नरेन्द्र को विवेकानन्द बनाने में क्या भूमिका अदा की? यह न सिर्फ हमारा, बल्कि भारतीय दर्शन के इतिहास का आवश्यक रोचक विषय है। गुरू और शिष्य-रामकृष्ण और विवेकानन्द, व्यक्ति नहीं युग-पुरूष हैं, हमारे राष्ट्रीय विचार के विकास-क्रम की ऐसी ऐतिहासिक कड़िया हैं, जिन्हें समझे बिना उस पहेली को सुलझाना मुमकिन नहीं, जिसे
अब देखना यह है कि इस अद्भुत पुरूष का स्वभाव और शक्ति क्या थी। नरेन्द्र ने उसे कैसे पहचाना और इस अद्भुत पुरूष ने नरेन्द्र को विवेकानन्द बनाने में क्या भूमिका अदा की? यह न सिर्फ हमारा, बल्कि भारतीय दर्शन के इतिहास का आवश्यक रोचक विषय है। गुरू और शिष्य-रामकृष्ण और विवेकानन्द, व्यक्ति नहीं युग-पुरूष हैं, हमारे राष्ट्रीय विचार के विकास-क्रम की ऐसी ऐतिहासिक कड़िया हैं, जिन्हें समझे बिना उस पहेली को सुलझाना मुमकिन नहीं, जिसे