तथाकथित आध्यात्मवादियों ने बुरी तरह उलझा दिया है, और तथाकथित बामपंथियों ने जिसकी निरन्तर अवहेलना तथा उपेक्षा की है।
द्वन्द्व
‘‘सत्य तो केवल उन्हीं को प्राप्त होता है, जो निर्भय होकर, बिना दुकानदारी किए उसके मंदिर में जाकर केवल उसी के हेतु उसकी पूजा करते हैं।’’
-विवेकानन्द
रामकृष्ण परमहंस एक सच्चे मनीषी थे। वह अपने मनन और भिन्न-भिन्न समाधियों द्वारा इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि ‘एक ही सत्ता एक साथ एक भी है और अनेक भी है’ और फिर घोषणा की थी कि हिंदू,
तथाकथित आध्यात्मवादियों ने बुरी तरह उलझा दिया है, और तथाकथित बामपंथियों ने जिसकी निरन्तर अवहेलना तथा उपेक्षा की है।
द्वन्द्व
‘‘सत्य तो केवल उन्हीं को प्राप्त होता है, जो निर्भय होकर, बिना दुकानदारी किए उसके मंदिर में जाकर केवल उसी के हेतु उसकी पूजा करते हैं।’’
-विवेकानन्द
रामकृष्ण परमहंस एक सच्चे मनीषी थे। वह अपने मनन और भिन्न-भिन्न समाधियों द्वारा इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि ‘एक ही सत्ता एक साथ एक भी है और अनेक भी है’ और फिर घोषणा की थी कि हिंदू,