‘खा’ कहकर खिलाने लगे। वे जब कभी नरेन्द्र को देखने आते, तो कुछ-न-कुछ अति उत्तम खाद्य वस्तु उनके लिए अवश्य बांधकर ले आते थे, बीच-बीच में लोगों के द्वारा भी भेज देते थे। नरेन्द्र अकेले खाने वाले तो थे नहीं, उनमें से कुछ संदेश लेकर पहले अपने मित्रों
34 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
को दिए, फिर स्वयं खाया। श्री रामकृष्ण इसके बाद बोले, ‘अरे तेरा गाना तो बहुत दिनों से नहीं सुना, जरा गाना तो गा।’ उसी समय तानपूरा लेकर, उसका कान ऐंठ,
‘खा’ कहकर खिलाने लगे। वे जब कभी नरेन्द्र को देखने आते, तो कुछ-न-कुछ अति उत्तम खाद्य वस्तु उनके लिए अवश्य बांधकर ले आते थे, बीच-बीच में लोगों के द्वारा भी भेज देते थे। नरेन्द्र अकेले खाने वाले तो थे नहीं, उनमें से कुछ संदेश लेकर पहले अपने मित्रों
34 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
को दिए, फिर स्वयं खाया। श्री रामकृष्ण इसके बाद बोले, ‘अरे तेरा गाना तो बहुत दिनों से नहीं सुना, जरा गाना तो गा।’ उसी समय तानपूरा लेकर, उसका कान ऐंठ,