35 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
और दृढ़-चरित्र युवक है और उसमें लोकनायक बनने की बड़ी सम्भावनाएं हैं। रामकृष्ण ने अपनी अंतदृष्टि से भांप लिया कि उनके ‘जितने मत उतने पथ’ सार्वभौम संदेश का प्रचार करने के लिए नरेन्द्र एक योग्य अधिकारी है। सिर्फ इतना ही नहीं उनकी मिथक-Ûष्टा समृद्व कल्पना ने उसे ‘सप्तर्षि-मंडल में से एक नर-रूपी नारायण’ बना दिया।
जिस तरह रामकृष्ण परमहंस को देखकर नरेन्द्र की एक राय बनी थी, उसी तरह नरेन्द्र को देखकर परमहंस की जो राय बनी,
35 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
और दृढ़-चरित्र युवक है और उसमें लोकनायक बनने की बड़ी सम्भावनाएं हैं। रामकृष्ण ने अपनी अंतदृष्टि से भांप लिया कि उनके ‘जितने मत उतने पथ’ सार्वभौम संदेश का प्रचार करने के लिए नरेन्द्र एक योग्य अधिकारी है। सिर्फ इतना ही नहीं उनकी मिथक-Ûष्टा समृद्व कल्पना ने उसे ‘सप्तर्षि-मंडल में से एक नर-रूपी नारायण’ बना दिया।
जिस तरह रामकृष्ण परमहंस को देखकर नरेन्द्र की एक राय बनी थी, उसी तरह नरेन्द्र को देखकर परमहंस की जो राय बनी,