तरह नहीं-वह यथार्थ ब्रह्मज्ञानी है। ध्यान के लिए बैठते ही उसे ज्योति दर्शन होता है, उसे मैं यों ही प्यार नहीं करता।’’(रामकृष्ण लीला प्रसंग, तृतीय खंड, पृ. 101)
नरेन्द्र के इन्हीं गुणों के कारण रामकृष्ण अपने शिष्यों में उसे सबसे अधिक प्यार करते और उसे अपनाकर अपने युग-कार्य के लिए तैयार करना चाहते थे। लेकिन नरेन्द्र भी सहज मंे हाथ लग जाने वाला नहीं था। वह भी दृढ़ संस्कारयुक्त गठन का असाधारण युवक था, जिसके बाहरी आचरण से लोग उसे उद्दंड,
तरह नहीं-वह यथार्थ ब्रह्मज्ञानी है। ध्यान के लिए बैठते ही उसे ज्योति दर्शन होता है, उसे मैं यों ही प्यार नहीं करता।’’(रामकृष्ण लीला प्रसंग, तृतीय खंड, पृ. 101)
नरेन्द्र के इन्हीं गुणों के कारण रामकृष्ण अपने शिष्यों में उसे सबसे अधिक प्यार करते और उसे अपनाकर अपने युग-कार्य के लिए तैयार करना चाहते थे। लेकिन नरेन्द्र भी सहज मंे हाथ लग जाने वाला नहीं था। वह भी दृढ़ संस्कारयुक्त गठन का असाधारण युवक था, जिसके बाहरी आचरण से लोग उसे उद्दंड,