रूख अपनाकर मिशनरियों के इस दावे को झुठलाया कि ईसाई धर्म चूंकि विजेताओं का और समृद्वि का धर्म है, इसीलिए यह सच्चा धर्म है और इसी को विश्व धर्म बनना है। विवेकानन्द ने उनके इस दावे को झुठलाते हुए कहा कि क्रमविकास के सिद्वांत के अनुसार द्वैत, विशिष्टाद्वैत, अद्वैत, एक के बाद एक, धर्म के तीन सोपान-तीन स्थितियां हैं। ईसाई धर्म तो अभी पहली ही सीढ़ी पर मंडरा रहा है और वह धर्म आज से हज़ारों साल पहले अद्वैतवाद की चरम सीमा तक पहुंच चुका था। धर्म तुम हमें क्या सिखाओगे,
रूख अपनाकर मिशनरियों के इस दावे को झुठलाया कि ईसाई धर्म चूंकि विजेताओं का और समृद्वि का धर्म है, इसीलिए यह सच्चा धर्म है और इसी को विश्व धर्म बनना है। विवेकानन्द ने उनके इस दावे को झुठलाते हुए कहा कि क्रमविकास के सिद्वांत के अनुसार द्वैत, विशिष्टाद्वैत, अद्वैत, एक के बाद एक, धर्म के तीन सोपान-तीन स्थितियां हैं। ईसाई धर्म तो अभी पहली ही सीढ़ी पर मंडरा रहा है और वह धर्म आज से हज़ारों साल पहले अद्वैतवाद की चरम सीमा तक पहुंच चुका था। धर्म तुम हमें क्या सिखाओगे,