योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

वो तुम जितना चाहे हमसे ले लो। भारत की जनता को तो रोटी चाहिए, कपड़ा चाहिए, सो तुम और तुम्हारी सरकारें उन्हें देने के बजाए उल्टा उनसे छीन रही है।

फिर उन्होंने अपना दावा पेश किया और वेदान्त दर्शन की तात्विक व्याख्या करते हुए बताया कि मनुष्य स्वभाव ही से पवित्र और आत्मस्वरूप है। जब प्रत्येक मनुष्य वेदान्त की चरम-उच्चतम स्थिति में पहुंचकर अपने इस आत्मस्वरूप

को पहचान लेगा तब आपस की घृणा, मतमतान्तर के झगड़े और भौगोलिक सीमाएं


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वो तुम जितना चाहे हमसे ले लो। भारत की जनता को तो रोटी चाहिए, कपड़ा चाहिए, सो तुम और तुम्हारी सरकारें उन्हें देने के बजाए उल्टा उनसे छीन रही है।

फिर उन्होंने अपना दावा पेश किया और वेदान्त दर्शन की तात्विक व्याख्या करते हुए बताया कि मनुष्य स्वभाव ही से पवित्र और आत्मस्वरूप है। जब प्रत्येक मनुष्य वेदान्त की चरम-उच्चतम स्थिति में पहुंचकर अपने इस आत्मस्वरूप

को पहचान लेगा तब आपस की घृणा, मतमतान्तर के झगड़े और भौगोलिक सीमाएं


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