37 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
बोला, ‘‘मुझे तो, महाराज यदि ऐसा होता तो यही विश्वास कर लेता तो यह मेरे मस्तिष्क ही का ख्याल है। पाश्चात्य विज्ञान और दर्शन ने इस बात को निस्संदेह प्रमाणित कर दिया है कि कान, आंख आदि इंद्रियां कई बार हमें भ्रम में डाल देती है। ये हमें पग-पग पर धोखा देती रहती हैं। आप मुझे प्यार करते रहते हैं और प्रत्येक विषय में मुझे बड़ा देखने की इच्छा करते हैं-इसीलिए सम्भवतः आपको ऐसे दर्शन होते रहते हैं।’’
37 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
बोला, ‘‘मुझे तो, महाराज यदि ऐसा होता तो यही विश्वास कर लेता तो यह मेरे मस्तिष्क ही का ख्याल है। पाश्चात्य विज्ञान और दर्शन ने इस बात को निस्संदेह प्रमाणित कर दिया है कि कान, आंख आदि इंद्रियां कई बार हमें भ्रम में डाल देती है। ये हमें पग-पग पर धोखा देती रहती हैं। आप मुझे प्यार करते रहते हैं और प्रत्येक विषय में मुझे बड़ा देखने की इच्छा करते हैं-इसीलिए सम्भवतः आपको ऐसे दर्शन होते रहते हैं।’’