योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



जो बात तर्क की कसौटी पर खरी न उतरे उस पर विश्वास कर लेना नरेन्द्र के स्वभाव के विपरीत था। वह रामकृष्ण के हर शब्द को तोलता था और संदेह व्यक्त रनके में सकुचाता नहीं था। रामकृष्ण भी नाराज़ होने या बुरा मानने के बजाय, इसी से उसे अधिक चाहते थे। नरेन्द्र के आने से पहले उन्हें काली से यह प्रार्थना करते सुना गया थाः

‘‘मां, मैंने जो कुछ उपलब्धियां प्राप्त की हैं, उनमें संदेह करने वाले किसी व्यक्ति को मेरे पास भेज दो।’’

नरेन्द्र


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जो बात तर्क की कसौटी पर खरी न उतरे उस पर विश्वास कर लेना नरेन्द्र के स्वभाव के विपरीत था। वह रामकृष्ण के हर शब्द को तोलता था और संदेह व्यक्त रनके में सकुचाता नहीं था। रामकृष्ण भी नाराज़ होने या बुरा मानने के बजाय, इसी से उसे अधिक चाहते थे। नरेन्द्र के आने से पहले उन्हें काली से यह प्रार्थना करते सुना गया थाः

‘‘मां, मैंने जो कुछ उपलब्धियां प्राप्त की हैं, उनमें संदेह करने वाले किसी व्यक्ति को मेरे पास भेज दो।’’

नरेन्द्र


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