योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

ने विज्ञान और पाश्चात्य दर्शन पढ़ा था। उसने जब दक्षिणेश्वर आना-जाना शुरू किया तो वह अंधविश्वास और मूर्ति-पूजा से सख्त घृणा करता था। उस समय न सिर्फ भक्तगण रामकृष्ण को अवतार मानते थे, बल्कि वे खद भी अपने को अवतार मानते थे और शिष्यों से कहते थे, ‘‘जो राम था, जो कृष्ण था वही अब रामकृष्ण है।’’ लेकिन नरेन्द्र ने इस बारे में उन्हें साफ-साफ कहा, ‘‘चाहे सारी दुनिया आपको अवतार कहे, पर जब तक मुझे इसका प्रमाण नहीं मिलता, मैं आपको वैसा न कहूंगा।’’


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ने विज्ञान और पाश्चात्य दर्शन पढ़ा था। उसने जब दक्षिणेश्वर आना-जाना शुरू किया तो वह अंधविश्वास और मूर्ति-पूजा से सख्त घृणा करता था। उस समय न सिर्फ भक्तगण रामकृष्ण को अवतार मानते थे, बल्कि वे खद भी अपने को अवतार मानते थे और शिष्यों से कहते थे, ‘‘जो राम था, जो कृष्ण था वही अब रामकृष्ण है।’’ लेकिन नरेन्द्र ने इस बारे में उन्हें साफ-साफ कहा, ‘‘चाहे सारी दुनिया आपको अवतार कहे, पर जब तक मुझे इसका प्रमाण नहीं मिलता, मैं आपको वैसा न कहूंगा।’’


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