योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

मिट जाएंगी। आध्यामिक अद्वैतवाद के आधार पर एक विश्व धर्म और विश्वबंधुत्व का स्वप्न साकार होगा।

विवेकानन्द ने स्वदेश लौटकर अपने कलकत्ता के भाषण में इसी आध्यात्मिक अद्वैतवाद के आधार पर विश्व की आध्यात्मिक विजय को भारत की वैदेशिक नीति का प्रारम्भ और अखंड राष्ट्रीय एकता स्थापित करना अपना प्रधान जीवनोद्देश्य बताया।

अब इतिहास इस बात का साक्षी है कि उन्नीसवीं सदी के अंत तक जो लड़ाई धर्म के क्षेत्र में लड़ी जा रही थी 1905 में


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मिट जाएंगी। आध्यामिक अद्वैतवाद के आधार पर एक विश्व धर्म और विश्वबंधुत्व का स्वप्न साकार होगा।

विवेकानन्द ने स्वदेश लौटकर अपने कलकत्ता के भाषण में इसी आध्यात्मिक अद्वैतवाद के आधार पर विश्व की आध्यात्मिक विजय को भारत की वैदेशिक नीति का प्रारम्भ और अखंड राष्ट्रीय एकता स्थापित करना अपना प्रधान जीवनोद्देश्य बताया।

अब इतिहास इस बात का साक्षी है कि उन्नीसवीं सदी के अंत तक जो लड़ाई धर्म के क्षेत्र में लड़ी जा रही थी 1905 में


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