योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



रामकृष्ण ने मुस्कराते हुए नरेन्द्र की बात का समर्थन किया और शिष्यों से कहाः

‘‘किसी भी बात को केवल मेरे कहने के कारण स्वीकार न करो। तुम स्वयं हर एक बात की परीक्षा करो।’’

रामकृष्ण अद्वैत सिद्वान्त की जो ब्रह्म की एकता सूचक शिक्षा देते थे, नरेन्द्र उस पर तनिक भी ध्यान नहीं देता था बल्कि कई बार उसका मज़ाक उड़ाते हुए अपने मित्र हाज़रा से कहा करता था, ‘‘क्या यह सम्भव है? लोटा इेश्वर है? कटोरा ईश्वर है, जो कुछ दिखाई पड़ रहा है तथा हम सब भी ईश्वर है।’’


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रामकृष्ण ने मुस्कराते हुए नरेन्द्र की बात का समर्थन किया और शिष्यों से कहाः

‘‘किसी भी बात को केवल मेरे कहने के कारण स्वीकार न करो। तुम स्वयं हर एक बात की परीक्षा करो।’’

रामकृष्ण अद्वैत सिद्वान्त की जो ब्रह्म की एकता सूचक शिक्षा देते थे, नरेन्द्र उस पर तनिक भी ध्यान नहीं देता था बल्कि कई बार उसका मज़ाक उड़ाते हुए अपने मित्र हाज़रा से कहा करता था, ‘‘क्या यह सम्भव है? लोटा इेश्वर है? कटोरा ईश्वर है, जो कुछ दिखाई पड़ रहा है तथा हम सब भी ईश्वर है।’’


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