योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

आलोचना दूसरों का कोई ख्याल न करते हुए कठोर भाव से प्रयुक्त होती थी, तो उससे वृद्व रामकृष्ण को दुख अनुभव होता था। नरेन्द्र ने रामकृष्ण के मुंह पर ही कहा था, ‘आप कैसे जानते हैं कि आपकी उपलब्धियां केवल आपके अस्वस्थ मस्तिष्क ही की उपज या केवल दृष्टिीा्रम मात्र नहीं हैं’’?

इन मतभेद के बावजुद अद्भुत पुरूष और असाधारण युवक के आपसी संबंध दिन-दिन कैसे घनिष्ठ और स्निग्ध होते जा रहे थे, इसके दो उदाहरण लीजिए।

नरेन्द्र कोई दो सप्ताह


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आलोचना दूसरों का कोई ख्याल न करते हुए कठोर भाव से प्रयुक्त होती थी, तो उससे वृद्व रामकृष्ण को दुख अनुभव होता था। नरेन्द्र ने रामकृष्ण के मुंह पर ही कहा था, ‘आप कैसे जानते हैं कि आपकी उपलब्धियां केवल आपके अस्वस्थ मस्तिष्क ही की उपज या केवल दृष्टिीा्रम मात्र नहीं हैं’’?

इन मतभेद के बावजुद अद्भुत पुरूष और असाधारण युवक के आपसी संबंध दिन-दिन कैसे घनिष्ठ और स्निग्ध होते जा रहे थे, इसके दो उदाहरण लीजिए।

नरेन्द्र कोई दो सप्ताह


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