से दक्षिणेश्वर नहीं आया था। रामकृष्ण उसे देखने के लिए व्याकुल हो उठे। कलकत्ता जाकर देखने का निश्चय किया। इतवार का दिन था। सोचा कि नरेन्द्र शायद घर पर न मिले, पर शाम को साधारण ब्रह्मसमाज की उपासना में भजन गाने अवश्य जाएगा। अतएव रामकृष्ण शाम को ब्रह्मसमाज के उपासना-भवन में उसे खोजने गए। जब वे वहां पहुंचे, उस समय आचार्य वेदी से व्याख्यान दे रहा था। वे अपने सीधे-स्वभाव से वेदी की ओर बढ़ चले। उपस्थित सज्जनों में से कइयों ने
से दक्षिणेश्वर नहीं आया था। रामकृष्ण उसे देखने के लिए व्याकुल हो उठे। कलकत्ता जाकर देखने का निश्चय किया। इतवार का दिन था। सोचा कि नरेन्द्र शायद घर पर न मिले, पर शाम को साधारण ब्रह्मसमाज की उपासना में भजन गाने अवश्य जाएगा। अतएव रामकृष्ण शाम को ब्रह्मसमाज के उपासना-भवन में उसे खोजने गए। जब वे वहां पहुंचे, उस समय आचार्य वेदी से व्याख्यान दे रहा था। वे अपने सीधे-स्वभाव से वेदी की ओर बढ़ चले। उपस्थित सज्जनों में से कइयों ने