उन्हें पहचान लिया। खुसर-पुसर शुरू हुई और लोग उचक-उचककर उन्हें देखने लगे।
रामकृष्ण वेदी के निकट पहुंचकर सहसा भावविष्ट हो गए। उन्हें इस अवस्था में देखने की उत्सुकता और भी बढ़ी। उपासना-गृह में गड़बड़ी मचते देख संचालकों ने गैस की बत्िायां बुझा दी। अंधेरा हो जाने के कारण जनता में मंदिर से निकलने के लिए हड़बड़ी मच गई।
नरेन्द्र को रामकृष्ण के वहा आने का कारण समझने में देर नहीं लगी। उसने आकर उन्हें सम्भाला। जब समाधि भंग हुई तो
उन्हें पहचान लिया। खुसर-पुसर शुरू हुई और लोग उचक-उचककर उन्हें देखने लगे।
रामकृष्ण वेदी के निकट पहुंचकर सहसा भावविष्ट हो गए। उन्हें इस अवस्था में देखने की उत्सुकता और भी बढ़ी। उपासना-गृह में गड़बड़ी मचते देख संचालकों ने गैस की बत्िायां बुझा दी। अंधेरा हो जाने के कारण जनता में मंदिर से निकलने के लिए हड़बड़ी मच गई।
नरेन्द्र को रामकृष्ण के वहा आने का कारण समझने में देर नहीं लगी। उसने आकर उन्हें सम्भाला। जब समाधि भंग हुई तो