योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

वह मंदिर के पिछले दरवाजे़ से किसी तरह उन्हें बाहर लाया और गाड़ी में बैठाकर दक्षिणेश्वर पहुंचाया। ब्रह्में ने रामकृष्ण के प्रति तनिक भी शिष्टाचार नहीं दिखाया बल्कि उनका आचरण अभद्रता और उपेक्षा का था। नरेन्द्र के मन पर इससे चोट लगी और उसने इसके बाद ब्रह्मसमाज में जाना छोड़ दिया।

रामकृष्ण ने नरेन्द्र की परीक्षा लेने के लिए एक बार ऐसा भाव अपनाया कि उसके दक्षिणेश्वर आने पर वे उसकी ओर कुछ भी ध्यान नहीं देते थे। न उसका गाना


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वह मंदिर के पिछले दरवाजे़ से किसी तरह उन्हें बाहर लाया और गाड़ी में बैठाकर दक्षिणेश्वर पहुंचाया। ब्रह्में ने रामकृष्ण के प्रति तनिक भी शिष्टाचार नहीं दिखाया बल्कि उनका आचरण अभद्रता और उपेक्षा का था। नरेन्द्र के मन पर इससे चोट लगी और उसने इसके बाद ब्रह्मसमाज में जाना छोड़ दिया।

रामकृष्ण ने नरेन्द्र की परीक्षा लेने के लिए एक बार ऐसा भाव अपनाया कि उसके दक्षिणेश्वर आने पर वे उसकी ओर कुछ भी ध्यान नहीं देते थे। न उसका गाना


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