सुनते और न उससे बातें करते। नरेन्द्र ने भी इसकी कोई परवाह नहीं की। वह आता और शिष्यों से हंस-बोलकर लौट जाता। प्रतापचन्द हाज़रा से उसकी
39 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
खासतौर पर पटती थी। वह कभी-कभी उसके साथ बातचीत और बहस में तीन-चार घंटे बिता देता। जब इस प्रकार जाते-जाते लगभग एक महीना बीत गया। एक दिन हाज़रा से बातें करने के बाद वह कुछ देर के लिए रामकृष्ण के पास भी जा बैठा।
जब नरेन्द्र उठकर जाने लगा, तब वे बोले, ‘‘जब मैं तुझसे बात नहीं करता,
सुनते और न उससे बातें करते। नरेन्द्र ने भी इसकी कोई परवाह नहीं की। वह आता और शिष्यों से हंस-बोलकर लौट जाता। प्रतापचन्द हाज़रा से उसकी
39 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
खासतौर पर पटती थी। वह कभी-कभी उसके साथ बातचीत और बहस में तीन-चार घंटे बिता देता। जब इस प्रकार जाते-जाते लगभग एक महीना बीत गया। एक दिन हाज़रा से बातें करने के बाद वह कुछ देर के लिए रामकृष्ण के पास भी जा बैठा।
जब नरेन्द्र उठकर जाने लगा, तब वे बोले, ‘‘जब मैं तुझसे बात नहीं करता,