योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

उसका मन अत्यन्त अशान्त था। बिना अनुभव किए ईश्वर को मानने की उपेक्षा नरेन्द्र नास्तिक बन जाना बेहतर समझता था।

निर्णय कर लेना सहज नहीं था। घर का वातावरण और पारिवारिक परम्परा भी दो परस्पर विरोधी आदर्श प्रस्तुत कर रही थी। एक तरफ दादा का त्याग था, जिन्होंने सब कुछ छोड़कर संन्यास धारण किया था। दूसरी तरफ पिता का भोगवाद

40 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

था, जिन्होंने वकालत जमाई थी, ज़्यादा से ज़्यादा रूपया कमाना और ठाठ से खर्च


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उसका मन अत्यन्त अशान्त था। बिना अनुभव किए ईश्वर को मानने की उपेक्षा नरेन्द्र नास्तिक बन जाना बेहतर समझता था।

निर्णय कर लेना सहज नहीं था। घर का वातावरण और पारिवारिक परम्परा भी दो परस्पर विरोधी आदर्श प्रस्तुत कर रही थी। एक तरफ दादा का त्याग था, जिन्होंने सब कुछ छोड़कर संन्यास धारण किया था। दूसरी तरफ पिता का भोगवाद

40 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

था, जिन्होंने वकालत जमाई थी, ज़्यादा से ज़्यादा रूपया कमाना और ठाठ से खर्च


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