करना ही उनके जीवन का लक्ष्य था। पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव से उन्होंने अतीत को भुलाकर वर्तमान में रहना सीखा था। वे संस्कृत नहीं जानते थे, इसलिए गीता और उपनिषद् आदि का अध्ययन उन्होंने नहीं किया था और न करने की आवश्ययकता ही महसूस की थी। वे चाहे अपने को स्वतंत्र चिंतक मानते थे, पर आत्मा तथा शरीर का क्या संबंध है? ईश्वर है या नहीं?-यह जानने की चिंता उन्होंने कभी नहीं की । फारसी के सूफी कवि हाफिज़ की कविता और बाइबिल में दर्ज
करना ही उनके जीवन का लक्ष्य था। पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव से उन्होंने अतीत को भुलाकर वर्तमान में रहना सीखा था। वे संस्कृत नहीं जानते थे, इसलिए गीता और उपनिषद् आदि का अध्ययन उन्होंने नहीं किया था और न करने की आवश्ययकता ही महसूस की थी। वे चाहे अपने को स्वतंत्र चिंतक मानते थे, पर आत्मा तथा शरीर का क्या संबंध है? ईश्वर है या नहीं?-यह जानने की चिंता उन्होंने कभी नहीं की । फारसी के सूफी कवि हाफिज़ की कविता और बाइबिल में दर्ज